किराए पर कौन-से कंप्रेसर हैं
| प्रकार | किस काम के लिए | सामान्य रेंज | कौन लेता है |
|---|---|---|---|
| डीज़ल पोर्टेबल स्क्रू (लो प्रेशर) | ब्रेकर, जैकहैमर, सैंड ब्लास्टिंग, पेंटिंग, शॉटक्रीट, बैचिंग प्लांट | 7–10 बार, 100–900 cfm | कंस्ट्रक्शन, फ़ैब्रिकेशन, शिपयार्ड ठेकेदार |
| डीज़ल पोर्टेबल स्क्रू (हाई प्रेशर) | बोरवेल, डीटीएच ड्रिलिंग, ग्रेनाइट लाइन ड्रिलिंग, वायर सॉ | 17–35 बार, 600–1,500 cfm; ज़रूरत पर बूस्टर | रिग मालिक, खदानें, माइनिंग ठेकेदार |
| इलेक्ट्रिक स्क्रू (स्किड पर) | फ़ैक्टरी कंप्रेसर ब्रेकडाउन, ओवरहॉल के दौरान, सीज़न का लोड, ऑडिट के समय स्टैंडबाय | 7–13 बार, 50–1,000 cfm; ड्रायर, फ़िल्टर के साथ | फ़ैक्टरी, राइस मिल, फ़ार्मा, फ़ूड प्लांट, अस्पताल |
| ऑयल-फ़्री / ड्रायर वाला सेट | फ़ार्मा, फ़ूड, इलेक्ट्रॉनिक्स – जहाँ एयर क्वालिटी का स्पेसिफ़िकेशन हो | स्पेसिफ़िकेशन के अनुसार | ऑडिट वाले प्लांट |
किराए में क्या शामिल है, क्या नहीं
- शामिल: मशीन, होज़, कपलिंग, व्हिप चेक; ज़रूरत पर रिसीवर, ड्रायर, फ़िल्टर; साइट पर सर्विस इंजीनियर की कमीशनिंग जाँच; किराए की अवधि में मशीन की सर्विस (डीज़ल मशीनों की 300 घंटे की सर्विस); समस्या होने पर सर्विस इंजीनियर की विज़िट।
- शामिल नहीं: डीज़ल (आपका); इलेक्ट्रिक मशीन के लिए बिजली का कनेक्शन (आपका); साइट पर मशीन की सुरक्षा।
- ऑपरेटर: चाहें तो ऑपरेटर के साथ देते हैं – ड्रिलिंग और खदान के काम में ज़्यादातर यही माँगते हैं।
कितनी बड़ी मशीन चाहिए? पहले से सही बताइए
मशीन छोटी हो तो काम धीमा, बड़ी हो तो डीज़ल बरबाद। सही साइज़ तीन बातों से तय होता है: कितना प्रेशर (बार या psi), कितनी हवा (cfm या m³/min), और एक साथ कितने टूल चलेंगे।
| काम | लगभग ज़रूरत | नोट |
|---|---|---|
| एक जैकहैमर / ब्रेकर | 7 बार, 60–90 cfm प्रति ब्रेकर | तीन ब्रेकर के लिए 250 cfm की मशीन काफ़ी |
| सैंड ब्लास्टिंग – 8 mm नोज़ल | नोज़ल पर 7 बार, लगभग 250 cfm प्रति नोज़ल | नोज़ल घिसने पर 25% ज़्यादा हवा चाहिए; सूखी हवा ज़रूरी |
| 6.5 इंच डीटीएच हैमर, बोरवेल | 17–25 बार, 700–1,100 cfm | गहराई और पानी के कॉलम से प्रेशर बढ़ना चाहिए; गहरे बोर के लिए बूस्टर |
| ग्रेनाइट लाइन ड्रिलिंग (3–4 इंच हैमर) | 17–20 बार, प्रति ड्रिल 280–350 cfm | एक मशीन से तीन ड्रिल चलाने पर होज़ की लंबाई और साइज़ बहुत अहम |
| फ़ैक्टरी स्टैंडबाय | आपकी मशीन की नेमप्लेट का प्रेशर, cfm | ड्रायर भी चाहिए या नहीं, बताइए |
अपने टूल की सूची या पुरानी मशीन की नेमप्लेट भेजिए, साइज़ हम निकाल देंगे। ड्रिलिंग के लिए हैमर का साइज़, बोर की गहराई और पानी कितनी गहराई पर मिलता है – इतना काफ़ी है।
कितने दिन, कहाँ तक
हैदराबाद के भीतर और आसपास के ज़िलों में छोटी अवधि के किराए भी संभव हैं। वारंगल, करीमनगर, खम्मम, नलगोंडा, कुरनूल, विजयवाड़ा जैसे ज़िलों में डिलीवरी में एक दिन लगता है, इसलिए वहाँ महीने के हिसाब से किराया तय होता है। विशाखापत्तनम, काकीनाडा, नेल्लोर, तिरुपति जैसी दूर की जगहों और दूसरे राज्यों के लिए प्रोजेक्ट के तौर पर – महीनों में, शुरू में ही काम का पूरा विवरण लेकर। साइट बदलने पर मशीन को दोबारा ले जाना भी किराए में योजना बनाकर किया जा सकता है।
उत्तर भारत से आए ठेकेदारों के लिए
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सड़क, सिंचाई, रेल, मेट्रो और भवन परियोजनाओं पर काम कर रहे बाहर के ठेकेदारों की एक आम दिक़्क़त यह है कि अपनी मशीनें हज़ार किलोमीटर दूर हैं और यहाँ का सप्लायर नहीं जानते। हम यहीं हैं: मशीन, होज़, सर्विस और पुर्ज़े एक ही जगह से, हिंदी में बात, और साइट पर कमीशनिंग। साइट का पता, काम की अवधि और टूल की सूची भेजिए – बाक़ी हम देख लेंगे। दक्षिण की गर्मी और धूल में मशीन कैसे चलानी है, इस पर हमारे सर्विस इंजीनियर आपके ऑपरेटर को समझाते हैं।
बोरवेल सीज़न का किराया
नवंबर से मई तक बोरवेल ड्रिलिंग का सीज़न है। रिग मालिक दूसरी रिग चलाने के लिए, या अपना कंप्रेसर ओवरहॉल में होने पर, पूरे सीज़न के लिए मशीन किराए पर लेते हैं। सीज़न शुरू होने से पहले (अक्टूबर में) बुक करना बेहतर है – फ़्लीट जल्दी भर जाता है। हैमर का साइज़ और सीज़न के सबसे गहरे बोर बताइए, उसी के हिसाब से मशीन देते हैं; ज़रूरत हो तो बूस्टर के साथ। विवरण बोरवेल कंप्रेसर पेज पर।
किराया बेहतर या ख़रीदना?
साल में कम घंटे चले तो किराया, ज़्यादा चले तो ख़रीदना – सामान्य नियम यही है, पर डीज़ल का ख़र्च दोनों में है, इसलिए सीमा आपके काम के घंटों से तय होती है। अंग्रेज़ी साइट के ख़रीदें या किराया कैलकुलेटर में अपने घंटे और डीज़ल का दाम डालकर देख सकते हैं। ख़रीदना हो तो टेस्ट की हुई सेकंड हैंड मशीनें भी हैं।
एक उदाहरण: कंस्ट्रक्शन साइट के लिए मशीन
शमशाबाद के पास एक ठेकेदार को दो महीने के लिए चार ब्रेकर और एक शॉटक्रीट मशीन चलानी थी। चार ब्रेकर लगभग 75 cfm प्रति ब्रेकर, शॉटक्रीट मशीन लगभग 200 cfm, सब एक साथ नहीं चलते, इसलिए लगभग 400 cfm पीक – 7 बार पर। 450 cfm की डीज़ल पोर्टेबल मशीन, 100 मीटर होज़ और मैनिफ़ोल्ड के साथ डिलीवर की, सर्विस इंजीनियर ने साइट पर कमीशनिंग जाँच की। 300 घंटे की सर्विस किराए की अवधि में हमने की; डीज़ल ठेकेदार का। दो महीने बाद साइट बदलने पर मशीन को नई साइट पर ले जाना भी किराए में ही तय किया।
हमें क्या भेजें
- काम क्या है: कंस्ट्रक्शन, ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, फ़ैक्टरी स्टैंडबाय
- प्रेशर, हवा (बार/psi, cfm) – न पता हो तो टूल की सूची या पुरानी मशीन की नेमप्लेट
- कितने दिन / महीने, कब से
- साइट कहाँ, थ्री-फ़ेज़ बिजली है या डीज़ल मशीन चाहिए
- ड्रिलिंग हो तो हैमर का साइज़, बोर की गहराई, पानी किस गहराई पर
- ऑपरेटर चाहिए या नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
किराए की मशीनें आपकी अपनी हैं?
हाँ, हमारा अपना फ़्लीट। सर्विस हम करते हैं, डिलीवरी हम करते हैं, हमारे सर्विस इंजीनियर साइट पर कमीशनिंग करते हैं।
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कम से कम कितने दिन के लिए?
हैदराबाद के आसपास छोटी अवधि के किराए संभव हैं। दूर के ज़िलों में डिलीवरी में एक दिन लगता है, इसलिए महीने के हिसाब से किराया तय होता है।
डीज़ल किसका?
आपका। डीज़ल मशीन का डीज़ल और इलेक्ट्रिक मशीन का बिजली कनेक्शन ग्राहक का होता है।
ऑपरेटर देते हैं?
चाहें तो हाँ। ड्रिलिंग, खदान और ब्लास्टिंग के काम में ज़्यादातर ऑपरेटर के साथ लेते हैं।
होज़ और ड्रायर भी देते हैं?
होज़ और कपलिंग किराए में शामिल हैं। पेंटिंग, ब्लास्टिंग, फ़ार्मा, फ़ूड के काम के लिए ड्रायर और फ़िल्टर भी सेट के साथ देते हैं – पहले बता दीजिए।
किराए की मशीन ख़राब हो जाए तो?
हमारे सर्विस इंजीनियर आकर ठीक करते हैं; ज़रूरत हो तो मशीन बदल देते हैं। किराए की अवधि में सर्विस हमारी ज़िम्मेदारी है।
दूसरे राज्य की साइट के लिए किराया मिल सकता है?
बड़े प्रोजेक्ट के लिए हाँ, प्रोजेक्ट के तौर पर – अवधि, मशीन और सर्विस की व्यवस्था शुरू में ही तय करके। साइट और काम का विवरण भेजिए।
दाम कितना है?
मशीन के साइज़, अवधि, दूरी और ऑपरेटर की ज़रूरत पर निर्भर है। ज़रूरत बताइए, कोटेशन देंगे; वेबसाइट पर अंदाज़न दाम नहीं रखते।
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Technical content reviewed by D. Srinivas Reddy, Managing Partner and service engineer, Reddy Compressors. Last updated 4 November 2026. How our engineering content is reviewed.